तन स्वतंत्र हो , मन स्वतंत्र हो
तन स्वतंत्र हो , मन स्वतंत्र हो ।
धरती का हर कण स्वतंत्र हो।
इस वर्ष जियेगी आजादी को,
बस यही हमारा मूल मंत्र हो।।
बहुत जमी को पैर से कुचला ,
जहाँ तहां फेंका है कचरा ।
स्वच्छ करें हर एक तंत्र को,
बस यही हमारा मूल मंत्र हो।।।
तन स्वतंत्र......
हर तरह धुंआ और तंबाकू है ,
इंसान नशे में बेकाबू है ।
जानफूक जीवन मे सबके ,
ऐसा कोई अब सिद्ध मंत्र हो।
तन स्वतंत्र....
अपमान नही सम्मान करें सब ,
अपने राष्ट्रनियन्ता का।
भारत जैसी धरती दी,
उस ईश्वर विश्वविधाता का।।
अब प्रण ले संकल्प करें हम।
मन कभी अब परतंत्र न हो ।
बस यही हमारा मूल मंत्र हो।।
तन स्वतंत्र हो मन स्वतंत्र हो ,
धरती का हर कण स्वतंत्र हो।।
संदेश रचित ।।।
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